बुधवार, 15 अप्रैल 2020

Krishna story in Hindi

कृष्णा की कहानियाँ 


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Krishna story


कृष्णा का जन्म अपने आप मे ही एक रोचक कथा है एक बार मथुरा का राजा कंस जो बहुत बुरा था वह अपनी बहन देवकी को रथ पे बिठा के उसके ससुराल ले जा रहा था। तभी बहुत तेज बिजली चमकी और आकाश से दिव्या आकाशवाणी हुई। उस आकाशवाणी मे बताया गया की हे कंस तुम्हरी बहन देवकी गर्भ से जन्मा आठवा पुत्र तुम्हारा काल होगा और उसके हाथो तुम्हारी मृत्यु होगी। 

और यह सुन के कंस भयभीत हो गया और उसने अपनी बहन देवकी को बंदी बना लिया और उनको बंदीगृह मे डाल दिया। और उनके पति को भी मरने को कहा तब देवकी जी ने कहा मै अपने आठवें पुत्र को आपके हवाले कर दूगी आप मेर पति को ना मरे।  इस बात को सुनते हुए उसने देवकी और उनके पति वासुदेव को कारागार मे डाल दिया। 

इस प्रकार समय आगे बढ़ता गया और कुछ समय बाद देवकी ने अपने पहले पुत्र को जन्म दिया। जिसका पता चलते ही कंस ने उसे मार दिया देवकी माता ने उससे बहुत रोका की आप मेरे पहले पुत्र को ना मरे उससे आपको कोई खतरा नहीं है लेकिन कंस ने उसको जमीन पे पटक के मार दिया।  और समय के साथ ही उनके सातो पुत्रो की हत्या कर दी। अब भगवान् श्री कृष्ण का जन्म होने वाला था और कंस इसी की प्रीतिशा कर रहा था। 

कृष्णा जन्म कहानी 

Krishna story in Hindi
Krishna birth story 


माता देवकी देवकी अपने इस आठवे पुत्र की उस कंस से बचाना चाहती थी। और जब माता देवकी के आठवे पुत्र ने जन्म लिया पुरे कारागृह मे सूर्य के सामान प्रकाश फैल गया। और उस प्रकाश मे चतुर्भुज रूप मे भगवान् श्री विष्णु ने दर्शन दिया। और कहा माता देवकी आप चिंता न करे आपके गर्भ से मेरा रूप जन्म लेगा जो आपके जीवन का उद्धार करेगा आप निश्चिंत रहे। यह सुन के देवकी और वासुदेव उनके चरणों मे गिर गए। भगवान् ने कहा मै आपके पुत्र के रूप मे जन्म लुगा और इतना कह के वह रौशनी अदृश्य हो गई।

और तभी देवकी और वासुदेव के हाथ पैर मे बंधी जंजीरे अपने आप खुल गई यह चमत्कार देख के दोनों दांग थे 
तभी कारागार के ताले भी अपने आप खुल गए और  जितने सैनिक वह पहरा दे रहे थे सारे के सारे गहरी नींद में सो गये। और वासुदेव ने अपने पुत्र को एक टोकरी मे रख के कारागृह से बाहर निकलने लगे तभी बहुत तेज वर्षा होने लगी।

वर्षा इतनी तेज थी की यमुना का पानी बहुत बढ़ गया था परन्तु वासुदेव जी ने यमुना पार करने के लिए आगे बढ़ गए। और जैसे जैसे वो आगे नदी पार करने के लिए आगे जाते पानी और ऊपर आता जाता। कहते है यमुना नदी भगवान् श्री कृष्ण के पैर छूने के लिए ऊपर आती जा रही थी यह देख कर भगवान् ने टोकरी से अपना पैर बाहर निकला और जैसे भगवान् का पैर नदी मे पड़ा नदी का स्तर अपने आप ही कम होने लगा। और वासुदेव नदी को आराम से पार कर लिया कुछ समय बाद वह उस बालक को ले के वृन्दावन पहुंच गए।

वृन्दावन मे वासुदेव महाराज नन्द के घर पहुंचे जहा माता यशोदा ने एक बहुत प्यारी पुत्री को जन्म दिया था। वह बालिका कोई और यही माया थी वासुदेव ने अपने बालक को वह भरी मन से रख दिया और उस पुत्री को अपने साथ वापस बंदीगृह मे ले आए जैसे ही वो वापस आए सरे सैनिक वापस होस मे आ गए ताले वापस बन्द हो गए।
किसी को कुछ पता नहीं चला। थोड़ी देर बाद जब कंस को यह सुचना मिली को देवकी ने एक पुत्र को जन्म दिया है। वह बहुत तेजी से वह पंहुचा उस बालक को मारने के लिए लेकिन वो देखता है की वह बच्चा पुत्र नहीं एक पुत्री है वह ये देख के सोच मे पड़ जाता है क्यू की आकाशवाणी मे कहा गया था की आठवा बालक पुत्र होगा।
लेकिन वह फिर भी उस नन्ही बालिका को ले के जाता है और उसे मारने के लिए हवा मे उठता है वह बच्ची गायब हो जाती है। और माया के रूप मे देखती है और कंस को चेतावनी देती है।

हे। पापी तू मुझे क्या मरेगा तेरी मृत्यु ने वृन्दावन में जन्म ले लिया है और कुछ समय बाद वह तेरा वध करेगा अपनी मृत्यु के लिया तैयार हो जा।

इतना कह के वह गायब हो गई। और यह सुन के कंस डर गया और क्रोधित भी हो गया।

यह थी भगवान् श्री कृष्णा की जन्म की कथा।

असुरों द्वारा श्री कृष्णा को मारने की कथा। 

Krishna story in Hindi
कृष्ण द्वारा पूतना वध 

कंस अब बहुत भयभीत हो गया था क्यू की उसके इतना प्रयास करने के बाद भी उसके काल ने जन्म ले लिया था और वो उसको किसी भी तरह मरना चाहता था। तब उसने अपनी एक मायावी रासाक्षी पूतना को वृन्दावन कृष्ण को मरने का आदेश दिया। पूतना ने एक बहुत ही सुन्दर स्त्री का रूप धरा और वृन्दावन पहुंच गई 
उसने कृष्ण को देखा और उसे आभास हो गया की यही कंस का काल है। उसने उस बालक को लिया और उस बालक को अपना बहुत ही विषैला दूध पिलाने लगी तब भगवान् कृष्ण ने उसको काट लिया और वह अपने असली रूप मे आ गई। और उसकी मृत्यु हो गई। 

जब यह बात नन्द को पता चली वही चिन्तित हो गए। की उनके बालक को असुर मरना चाहते है
और जब कंस को यह बात पता चली उसे यकींन नहीं हुआ की एक बालक ने पूतना जैसी रासाक्षी को मार दिया। अब उसको इस बात पे पूरा यकीन हो गया की उसके काल ने वृन्दावन मे जन्म ले लिया है।

उसके बाद कंस ने अपने एक ताकतवर राक्षस तृणावर्त को भेजा। और उसको सावधान किया की बालक जान कर इसको कम ना जाने अपनी पूरी शक्ति से प्रहार करे। उस राक्षस ने वृंदावन मे एक तेज आंधी के रूप मे गया सारा गांव भयभीत हो गया सभी अपने-अपने घरों मे चले गए। तब उस राक्षस ने चुपके से उस बालक को लिया और तेजी से हवा मे ले उड़ा वह कृष्ण को आकाश मे लिए जा रहा था 

ताकि वह से फेक सके लेकिन उस बालक को कोई भय नहीं था वह मुस्कुरा रहा था वह राक्षस जब बहुत ऊपर पंहुचा तभी उसको लगा इस बालक का भार बढ़ता जा रहा है। और वह उसको ले के ऊपर की जगह वापस नीचे जा रहा है तभी उसने उस बालक को फेकना चाहा लेकिन कृष्ण ने उस राक्षस का गला पकड़ लिया 
और गला दबा कर उसको परलोक पंहुचा दिया और वह राक्षस धरती पे आ गिरा और मर गया। 

वह कोई साधारण बालक नहीं स्वम् भगवान् विष्णु है। जो जीवन ले सकते है और जीवन दे भी सकते है 

जब यह बात कंस को पता चली तब वह बहुत भयभीत हो गया उसको अपनी मृत्यु दिखने लगी उसको वो आकाशवाणी हर रात सपने मे सुनाई देने लगी। 
इस प्रकार भगवान् श्री कृष्ण ने कई राक्षसों का परलोक पंहुचा दिया जो बहुत ताकतवर थे उन को मार के भगवान् ने इस धरती के ऊपर उपकार किया। 

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