गुरुवार, 9 अप्रैल 2020

Gautam buddha in hindi

                          Gautam buddha in hindi

नमो बुद्धाय  दोस्तों आज हम जिस महान इंसान के बारे मे जानने जा रहे हे।  वो एक सिद्ध एवम  ईस्वर को जानने वाले एक महान  आत्मा ज्ञानी  पुरुष है। गौतम बुद्धा हैं  इनका जन्म 563 ईसा पूर्व लुम्बिनी में ,जो नेपाल में है  एक  इक्ष्वाकु वंशीय क्षत्रिय शाक्य कुल के राजा शुद्धोधन के घर में हुआ था। इनकी माता का नाम महामाया था जो की एक कोलीय वंस से थी।  दुर्भाग्य वास् इसके जन्म के सात दिन बाद इनकी माता का निधन हो गया। 
Gautam buddha in hindi
Gautam buddha


इस कारन उनका पालन महारानी की छोटी सगी  बहन महाप्रजापती गौतमी ने किया।  इनका नाम  सिद्धार्थ  रखा गया था।  और गौतम गोत्र मे जन्म होने के कारन वो गौतम भी कहे जाते है। सिद्धार्थ नाम का अर्थ है। 
"वह जो सिद्धि  प्राप्ति के लिए जन्म लिया हो " जन्म के साथ ही 8 महान ब्राह्मण  विद्वानों को भविष्य पढ़ने के लिए बुलाया गया।  सभी ने एक सी बात कही राजन यह बालक या तो एक महान राजा बनेगा या एक महान साधु बनेगा।  जो लोगो को पवित्र पथ दिखाएगा। 

सिद्धार्थ का मन बचपन से ही करुणा और दया का भंडार रहा है जहा सभी जीवो के लिया दया की भावना रही है।  इसके कई उद्धरण हमें मिलते है जैसे जब घुड़दौड़ में घोड़े भागते भागते थक जाते और उनके मुख से झाग निकलने लगता तब सिद्धार्थ उन्हें थका जान कर उन्हे वही रोक देते और जीती हुई बाज़ी हार जाते थे।  इस विषय में एक महान  कथा है जिसमे सिद्धार्थ ने अपने चचेरे भाई से देवदत्त से जिसने एक हंस को अपने तीर से घायल किया था। सिद्धार्थ ने उस हंस की सहायता की और उसके प्राणों को बचाया था। 

धर्म                     ➨  बौद्ध धर्म 

जन्म                    ➨ ईसवी पूर्व 563 ,( लुंबिनी , नेपाल )

निधन                  ➨ ईसवी  पूर्व 483  ( 38 वर्ष आयु  ) कुशीनगर , भारत 

जीवनसाथी          ➨ यशोधरा 

बच्चे                   ➨ राहुल 

माता                  ➨ मायादेवी 

पिता                   ➨ शुद्धोधन 


बुद्धा  शिक्षा एवं विवाह:


सिद्धार्थ ने महान गुरु विश्वामित्र के यहाँ वेदो और उपनिषदो की शिक्षा के साथ ही राजकाज और युद्ध विदया भी मिली थी।  इसके साथ हे उन्हे घुड़दौड़,धनुर्विद्या ,रथ चलने मे उनकी बराबरी कोई नहीं कर सकता था। 

16 वर्ष की आयु में सिद्धार्थ का यशोधरा नामक कन्या से विवाह हो गया। पिता द्वारा बनाए गए एक वैभवशाली और समस्त भोगो से युक्त महल मे यशोधरा के साथ रहने लगे।  जहा उनके पुत्र का जन्म हुआ।  लेकिन उसके कुछ समय बाद ही उनके मन में वैराग्य चला और सुख : शांति के लिए अपने महल परिवार सब का त्याग कर दिया। 

गौतम बुद्ध की ज्ञान प्राप्ति 

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 सिद्धार्थ ने अपने प्रश्न के उत्तर ढूढ़ने का निश्चय कर लिया। और जंगलो मे विचरने लगे फिर भी उन्हे अपने प्रश्नो के उत्तर नहीं मिले तब उन्हे उनके पहले गुरु मिले जिनका नाम आलार कलाम थे। जिन्होंने सिद्धार्थ को सन्यास की ज्ञान दिया। अपने गुरु से ज्ञान मिलने के बाद भी वह पूरी तरह संतुस्ट नहीं थे। इसके बाद वह अपने कुछ साथियो के साथ चल दिए।  और जंगल मे कठोर तप करने लगे। ऐसा करते हुए उन्हे 6 वर्ष बीत गए।  उनकी तपस्या बहुत कठोर थी। उनका शरीर बहुत कमजोर हो गया था।  वह देखने में बिना मांस के शरीर की तरह लग रहे थे। भूख और प्यास से वह मृत्यु के बहुत निकट पहुंच गए थे।

 एक दिन एक सुजाता नाम की स्त्री एक प्याले मे खीर ले जा रही थी।  उसने देख एक साधु  पीपल के पेड़  नीचे बैठ के तप कर रहे थे।  उसको उनपे दया आ गई।  उसने वह खीर सिद्धार्थ को दिया।  और कहते है खीर खाने क बाद उस दिन ही सिद्धार्थ को ज्ञान प्राप्त हुआ। उसी रात उन्हे ज्ञान प्राप्त हो गया या उन्हे बोध हो गया।  तभी से उन्हे सिद्धार्थ से गौतम बुद्ध कहा जाता है  35 की आयु में वह  गौतम बुद्ध बन गए । और जिस पीपल के पेड़ के निचे उन्हे ज्ञान मिले उसको बोधिवृछ या Bodhi tree कहा जाता है। 

बुद्ध को शाक्यमुनि के रूप मे भी जाना जाता है। बुद्ध ने सात हफ्तों तक मुक्ति का और स्वतन्र्ता का और शांति का आनंद लिया। वह शुरू मे यह ज्ञान दुसरो को नहीं देना चाहते थे बुद्ध का मानना था यह ज्ञान दुसरो को समझाना बहुत मुश्किल है। पर कहते है एक दिन बुद्ध हो आकाश वाणी से कहा गया तब बुद्ध ने यह ज्ञान लोगो को देने के लिए सहमत हुए।  

Gautam buddh vichaar- गौतम बुद्ध के विचार 

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बुद्ध के विचार अनमोल है इनको अपने जीवन मे अपना कर मानव अपना जीवन सफल कर सकता है। 

➧ मनुस्य के सभी गलत कामो की नीव मन से ही होती है।  परन्तु यदि मन परिवर्तित और पवित्र हो जाए तो गलत काम नहीं हो सकते है। 
➧ तीन  चीजे कभी नहीं छुप सकती - सूर्य चन्द्रमा तथा सत्य। 
➧ जो जैसा सोचता है वैसा बन जाता है। 
➧ शांति हमारे भीतर ही है इस को बाहर तलाश करना व्यर्थ है। 
➧ हमारा दिमाक ही हमारा सच्चा दोस्त है और हमारा दुश्मन भी। 
➧ बुराई को बुराई से कभी भी नहीं ख़तम किया जा सकता। और घृणा को केवल प्रेम से ही समाप्त किया जा           सकता है।  यह एक परम सत्य है। 
➧ सत्य के मार्ग पर चलता हुआ मनुस्य केवल दो ही गलती करता है।  प्रथम या वो पूरा रास्ता नहीं हे तय नहीं करता है  तथा दूसरी गलती वह शुरुआत ही नहीं करता है। 
➧ भविस्य के सपनो मत खोए रहो और भूतकाल के काल मे मत उलझे रहो केवल वर्तमान पे ध्यान दो।  जीवन मे शांति और खुशी से रहने का यही उत्तम मार्ग है। 
क्रोध मे हजारो शब्दो को गलत तरीके से बोलने से अच्छा, मौन वह एक शब्द है जो मनुस्य के जीवन मे शांति ला सकता है। 
➧ अगर आपकी एक मनोकामन पूरी होती है तो दूसरी तुरंत जन्म ले लेती  है। 
➧ खुद को कभी भी किसी दूसरे के दुःख का कारण नहीं बनने देना चाहिए। 



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